जल जीवन मिशन

जल जीवन मिशन की स्थापना हमारे प्रधान मंत्री जी द्वारा 15 अगस्त 2019  में गयी थी जिसका उद्देश्य था की शहर से लेकर ग्रामीण तक लोगो को पाइप द्वारा सप्लाई नल कनेक्शन मिले 2024 तक।  लेकिन अभी तक इसमें हमारी सरकार 100 % सफल नहीं हुआ  हैं लेकिन इस पर कार्य जोर सोर के साथ ग्रामीण इलाको में चल रही हैं।  मैंने रीसर्च में कई ग्रामीण इलाको में पाया की वहा  नल कनेक्शन सप्लाई का पानी आ रहा हैं लेकिन आज भी ग्रामीण के लोगो से एक सवाल हमेशा सुनने को मिलता  हैं कि क्या जिस प्रकार से सरकार लाइट की बिल या अन्य सुविधा के लिए हमें सरकार को बिल देने होते उसी प्रकार की सेवा ये भी तो नहीं हो जाएँगी। 

मैंने  जब पाइप लगाने वाले व्यक्तियों से बात की तो पता चला काफी लोग इतना डरे हुए हैं कि ग्रामीण क्षेत्र में वे अपने घर के सामने अभी तक पाइप नहीं लगवाए लड़ाई करने को तैयार हो जाते उनका सवाल ये भी हैं की क्या हमें सरकार स्वच्छ जल  सप्लाई करेगी  या नहीं तब तो हमारे घर का नल बंद करा दिया जायेगा शहर की तरह और इसका भी बिल लेगी सरकार हमसे एक कारण ये भी है कि सरकार अभी तक क्यों जल जीवन मिशन में  सफल नहीं हो पायी हैं हालाँकि सरकार इस मिशन को बढ़ा कर 2028 कर दिया हैं जिससे सभी ग्रामीण घर तक ये सुविधाएँ पहुँच सके। इसीलिए  सरकार का उद्देश्य है की प्रत्येक ग्रामीण के घर तक स्वच्छ जल पहुंचे और हम जल की ज्यादा मात्रा में नुकसान होने से बचा सके। 


आज हमें समझने का प्रयास करना ही होगा की भविष्य में जल की संकट बढ़ने वाली हैं क्योंकि जल का उपयोग करके हम बहुत सारे भौतिक सुविधाओं का निर्माण कर रहे हैं जिससे फिर उससे निकले ख़राब पदार्थ को नदी,नालो  में छोड़ देते जिससे कि नदी, नालो  का जल  दूषित हो चुका है जो हमारे पीने योग्य नहीं बचा यहाँ तक बड़े -बड़े महासागर का पानी भी दूषित हो चूका हैं उसका कारण हम स्वयं हैं ग्रामीण के लोगो से जब हम बात करते हैं तो वे कहते है सारा प्रदूषण हमने तो नहीं किया फिर हमें क्यों ये बता रहे हो एक प्रकार से उनका कहना  भी सही हैं पर ये कहने से उन्हें मुक्ति तो नहीं मिल जाएँगी। 

हम सभी जानते हैं की कुल जल का केवल 2.5% जल पीने योग्य हैं 1 % से कम स्वच्छ जल हमारी पृथ्वी पर पायी जाती  हैं और बची हुयी जल हम पेस्टिसाइड, केमिकल्स, का प्रयोग करके  दूषित बना दिए हैं  आज भूमि के नीचे  के जल का स्तर इतना दूषित हो चूका हैं की वह पीने योग्य ही नहीं बचा इसलिए सरकार ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए जल जीवन मिशन को 2019 में लेकर आए जिससे समय रहते हम जल को सरंक्षित कर सके इसलिए  हमें मिलकर सरकार की  रणनीति को सराहनीय तरीके से अपनाना चाहिए और सरकार के  इस मिशन को सफल बनाने का प्रयास करना चाहिए जिससे हम सभी भविष्य के जल संकट से बच सके।

हम सभी जानते है की ग्रामीण में भी काफी ज्यादा जल का दुरूपयोग होता जैसे की जहा दो बाल्टी जल की  आवश्यकता होती हैं वह चार बाल्टी जल का प्रयोग हम करते हैं इसी प्रकार यदि प्रत्येक नागरिक  जल का दुरूपयोग करता रहा तो हमारे लिए संकट का कारण बन सकता है जल जीवन मिशन के अनुसार हमें जल एक निश्चित मात्रा में प्राप्त होगा जिससे की हम जल के दुरूपयोग से बच सकें और अपनी आवश्यकता अनुसार जल का प्रयोग  करें आज ग्रामीण इलाको में जल का भारी मात्रा में दुरूपयोग कृषि क्षेत्र में हो रहा लोग मोटर बांधकर घर चले आते और जल नाजायज चलता रहता हैं  जिससे वह जल किसी प्रयोग में नहीं आता हैं। 

चूकि हम जानते हैं की ये मिशन केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर कर रही हैं तो सरकार को इस बारे में भी सोचना चाहिए कि भारत में धान और गेंहू की खेती प्रचुर मात्रा में की जाती हैं जिसमें सबसे ज्यादा भूमि के जल में कमी आ रही हैं और सबसे ज्यादा पेस्टिसाइड और केमिकल का प्रयोग किया जाता हैं जिससे भूमि का जल सबसे ज्यादा दूषित और प्रभावित हो रही है आने वाले समय हमारे बच्चो के पास ना ही अच्छी क़्वालिटी का मिटटी होगा ना  ही अच्छी क़्वालिटी का जल होगा खेती करने के लिए साथ में जल पीने की भी संकट आ सकती इस सब को ध्यान में रखते हुए हमें अच्छी रणनीति से आगे की तरफ बढ़ना होगा। 

जल जीवन मिशन भले ही ग्रामीण क्षेत्रो तक नल कनेक्शन से जोड़ने का एक मात्र संदेश हो लेकिन अब समय आ गया है की हम अपने आगे के भविष्य के बारे में भी सोचे जिनको बाद में ये न कहना पड़े की हमारे पूर्वज हमारे साथ अन्याय किये बल्कि हमें अच्छी रणनीति अपना कर उनके भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयास करना चाहिए मैं एक कविता के माध्यम से स्पष्ट करना चाहूंगा। ये कविता मैं तब लिखा था जब ग्रामीण में किसान अपने फसलों को जल नहीं दे पा रहे थे क्योंकि वर्षा न होने के कारण  समस्या उत्पन्न हुयी थी। 

पानी का है मचा शोरगुल नलका बोरिंग सूख रहे,
तीक्ष्ण विवश की बढ़ी धाराएँ 
और किसानो के मुख रूठ रहे 
किंचित ध्वनि की राग सजाये 
पंक्षी भी अब बंजारे हुए 
वर्षा की आश लगाए 
घास की तिनके जूझ रहे 
पानी का है मचा शोरगुल 
नलका बोरिंग सुख रहे। 


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