गाँव
मेरा जन्म एक छोटे से गाँव में हुआ वहा की खूबसूरती में मेरा बचपन बीता था हालाँकि वहा खेलने के लिए हमारे पास संसाधन कम होते थे लेकिन हमारे पास अवसर कम नहीं होते थे हम खेलने के लिए अलग -अलग संसाधन ढूढ ही लेते थे कही हम लोग समूह बनाकर लुका छिपी खेलते तो कही ज़मीन पर लकीरे खींच कर एक दूसरे की लकीरे ढूढते और जो ज्यादा लकीरे खोजकर मिटाने में सफल होता था वही विजयी होता था यदि सामान्य रूप से कहा जाय तो हम शहर से ज्यादा आनन्द लेते थे गाँव में पर समय के अनुसार तकनीक आया और सब कुछ खुद में समेट लिया अब जब मैं गांव जाता तो देखता हूँ जहा हम पहले खेला करते थे वहा घर बन गए। जिन जंगलो में हम भैंस गाय चराने जाया करते थे वह जंगल कट गए और वहा फसल उगने लगे जिन तालाबो में हम मछली पकड़ते थे और पौनार, भसीड़ निकाल कर खाया करते थे अब वे तालाब पोखरे मछली पालन करने वालो का कब्ज़ा हो गया।
यदि स्पष्ट रूप से कहा जाय तो गाँव में बहुत कुछ बदल गया अब लोग गाँव में कम रहना पसंद करते क्यूंकि ज्यादातर उनका जीवन शहर के उन गलियों में सिमट कर रह जाती हैं जहा उनको रोजगार मिला, कुछ लोगो को अच्छी जीवन मिली उससे दूसरे लोग भी प्रभावित हुए और वे भी शहर की तरफ गए और धीरे - धीरे गाँव का हसना खेलना सब सिमट कर रह गया। दीपावली का पर्व धीरे -धीरे पास आ रहा हैं और गाँव के वे दिन याद आ रहे की जब हम गाँव के बच्चे साथ मिलकर पटाखे जलाते और सभी लोग एक दूसरे के घर जाकर मिठाइयाँ देते और लोगो का पैर छूकर लोगो का आशीर्वाद लेते थे जब हम लोग दीपावली पर्व का आनंद ले लेते तो फिर दो घंटे किताब लेकर पढ़ते थे क्यूंकि हमारे बुजुर्गों का कहना था की बेटा आज के दिन हमें जरूर पढ़ना चाहिए क्यूंकि आज के दिन पढ़ने से पूरे साल भर पर असर पड़ता हैं कुछ भी हो पर हम लोग अपने बुज़ुर्गो का कहना मानते थे।
भले ही आज हम गाँव भूलते जा रहे हैं लेकिन हम अपनी अतीत नहीं भूल पाते जो पल हमने अपने में बिताये हैं आज भी लोग जब अपने जीवन का अंत समय या बुढ़ापे का समय आता हैं तो वे गाँव में आकर अपना जीवन गुज़ारते हैं। गाँव में लोगो का खिलखिलाकर हसना, एक दूसरे को समय देना, सुबह - शाम की स्वच्छ पर्यावरण की अनुभूति करना ये भी किसी वरदान से कम नहीं जिसकी अनुभूति हमें तब होती जब हम शहर से थके हारे घर आते हैं और घर के लोगो का प्यार पाकर शहर के थके हारे जीवन को भूलकर अपनी दुनिया में रम जाते है गांव के लोगो का साथ हमारे ऊपर होता यदि हम कभी बीमार पड़ते तो लोग हमें देखने आते यदि इलाज के पैसे न हो तो चंदा लगा कर इलाज के पैसे इकठ्ठा करके इलाज करवाते ये लोगो का प्यार आज भी गाँव में जीवित है जो हमें गांव की तरफ रहने के लिए हमेशा प्रेरित करता हैं।
गाँव में भले ही गरीबी कितनी ही क्यों न हो पर लोगो के ह्रदय में लोगो के प्रति प्यार आज भी जिन्दा हैं मैंने काफी लोगो को देखा हैं जिनके पास रहने के लिए घर नहीं होता तो उनको लोग रहने के लिए अपना जमीन दे देते है। जिस जमीन पर वह घर बनाकर रहते है आज वैश्वीकरण इतना विकट रूप ले चुका है कि इससे गाँव के रहन सहन वेशभूषा में काफी बदलाव देखने को मिलता है अब लोगो में पहले की अपेक्षा ज्यादा लालच देखने को मिलता हैं। लालच होने के विभिन्न कारण हैं जैसे गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की बढ़ती महगाई। समाज के बीच फैलती तेजी से नयी - नयी तकनीक जो गाँव के लोगो की जीवन शैली को बदल रहा हैं।
अब लोग एक दूसरे के घर बहुत कम उठते बैठते सभी अपनी - अपनी समस्याओं में उलझे हुए हैं अब गाँव के ज्यादातर पुरुष अपनी औरत को शहर लेकर जाते और धीरे - धीरे वही रह जाते। मैंने रिसर्च में पाया की ज्यादातर नौकरी, व्यापार करने वाले व्यक्ति अपने परिवार के साथ शहर में ही व्यवस्थित हो जाते हैं क्यूंकि वहा अच्छी शिक्षा,स्वास्थ्य,और रोजगार है। बचे लोग जिनके पास पैसे का स्रोत कम हैं वे गाँव ही रहते है। मैंने रिसर्च में पाया की 100 में 90 % लोग जब शहर व्यवस्थित हो जाते तो घर की बची ज़मीन भी बेच देते हैं दूसरो को जो कि गाँव के व्यक्ति को काफी आघात लगता हैं वे कहते हैं की जब उनके पास अच्छी नौकरी है अच्छा घर हैं फिर भी उनमें संतोष नही होता है कि वे घर की बची ज़मीन भी बेच देते है।
गाँव के लोगो का मानना होता हैं ज़मीन हमारी धरोहर हैं जो हमारे बुज़ुर्गो ने बड़ी मेहनत से इसे हमारे लिए बचा के रखा था और वही ज़मीन ये बेच देते हैं जिससे गाँव में हमारी मान सम्मान को बेच देने के बराबर होता है मैं एक कविता के माध्यम से समझने का प्रयास करता हूँ।
महसूस अगर कुछ कर पाते,
इस पल तो अच्छा ही होता
जीवन की ये अनसुलझी
दुनिया का रहस्य हर दिन
कुछ नया सिखाता
भूखे को रोटी और प्यासे को पानी के सिवाय
क्या मिल जाता जो
महसूस कर पाते हम।

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