जलवायु परिवर्तन : यह हमारे जीवन और भविष्य को कैसे प्रभावित कर रहा है।

 जलवायु परिवर्तन किस प्रकार हमारे जीवन को प्रभावित कर रही हैं इस विषय पर हम सभी को संवेदनशील होने की ज़रूरत हैं क्योंकि जब हम जलवायु परिवर्तन पर संवेदनशील होंगे तभी हम इसके प्रभाव के बारे में सही निर्णय निकाल पाएंगे की ये किस प्रकार हमारे दिनचर्या को प्रभावित कर रही है आज हम सभी समाचार पत्रों, टेलीविजन, सोशल मीडिया और अन्य संस्थाओ के माध्यम से ये जानने में समर्थ हैं। कि किस प्रकार जलवायु परिवर्तन हमारे दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है यही नहीं इसका हमारे भविष्य पर चलकर क्या खतरा पड़ेगा जिसकी हम आज कल्पना भी नहीं कर सकते है। एक सवाल जो हमारे दिमाग अक्सर आता हैं की आखिर जलवायु परिवर्तन हैं क्या और यह किस प्रकार हमारे जीवन को प्रभावित कर रहा है तो चलो जानने की कोशिश करते है। 


जलवायु परिवर्तन हैं क्या 

किसी स्थान पर लम्बे समय से चल रही प्राकृतिक गतिविधियो में अचानक वहा के ताप और मौसम में हुए परिवर्तन को ही जलवायु परिवर्तन कहते है वैसे तो जितनी सहजता से हमने इसकी व्याख्या की उतनी सहजता के साथ जलवायु परिवर्तन होता नहीं है इसके पीछे बहुत सी मानवीय और प्राकृतिक गतिविधियाँ होती है इसे इस प्रकार समझे की हम प्रत्येक दिनचर्या अपने जीवन में नकारात्मक विचार का सेवन करे और एक समय ऐसा आएगा की हम नकारात्मक प्रवृत्तियों से घिर जायेंगे और वह हमें और हमारे जीवन को ही प्रभावित कर देता है ठीक वही हमारे जलवायु के साथ भी हो रहा हैं। 

किस प्रकार यह मानव जीवन को प्रभावित कर रहा है 

मानव जीवन को यह विभिन्न तरीको से प्रभावित कर रहा है कुछ चीजों को जानने का प्रयास करते है।  मैंने यह प्रभाव मानव पर देखने के लिए अलग - अलग कंस्ट्रक्शन स्थान पर गया जैसे L$T , TATA , SHAPUR JI, JAI SHAH व अन्य छोटी कंस्ट्रक्शन स्थान वहा के लोगो को देखा और अन्य टेक्नोलॉजी कारखाने नेहरू विहार, लक्ष्मी नगर व अन्य चल मानवीय गतिविधियों वाले स्थान पर गया वह के लोगो से बात की क्या ये गतिविधिया आपको लाभ के सिवाय हानि भी पहुँचाती है।  वे बोले की भैया आप यहाँ काम करके देखे फिर जो अनुभव होगा आपको वह हमारे व्याख्या से कही ज्यादा होगा जो हम शब्दों में बया नहीं कर सकते। 

मैं कुछ दिन रहकर देखा जहा भी कोई सरकारी प्रोजेक्ट जाता वह की पूरी क्षेत्र ही विकसित हो जाती वह की पेड़ पौधे काट दिए जाते उस बिल्डिंग को तैयार करने में बड़े बड़े पत्थर लगते वे पहाड़ो से आते मतलब जितनी भी चीजे वह इस्तेमाल की जाती है धरती और प्राकृतिक की शोषण द्वारा ही बनते है जो ये सभी मानवीय गतिविधियों द्वारा ही किये जा रहे है यह उस समय कार्य कर रहे लोगो को प्रभावित करती ही है लेकिन इसका लम्बे समय तक मानव और अन्य जीव जन्तु को प्रभावित करती रहती है। 

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव मौसम पर 

हम सभी इस बात से अनभिज्ञ नहीं की जलवायु परिवर्तन का मौसम पर प्रभाव किस प्रकार हो रहा हैं हम देख सकते है की कही अच्छी वर्षा हो रही है तो वही दूसरी तरफ सूखा पड़ा हुआ हैं कही ठण्डी हवाएं चल रही है तो कही गर्म हवाओं ने कहर ढाई है। सामान्य रूप से हम कह सकते है की मौसम का भी अब कोई एक समय सीमा नहीं रह गया अचानक मौसम बना और बारिश हो गया समय के पहले ठण्ड लगने लगती है और समय के बाद तक भी गर्मी पड़ती है अचानक कही बाढ़ आ गयी और उस बाढ़ से हजारो लोग प्रभावित हो गए तो कही भूस्खलन हो गयी मतलब यदि हम जागरूक पूर्वक देखे तो हमें बहुत सी मौसमी गतिविधियों का आकलन हो जाएगा। 

कृषि क्षेत्र को किस प्रकार प्रभावित कर रहा है 

हम सभी कही न कही कृषि से जुड़े हुए हैं वे चाहे भोजन प्राप्त करने तक हो या कृषि सँभालने तक, आज के किसानो की सभी बड़ी समस्या बन चुकी है जलवायु परिवर्तन। किसान अब प्रत्येक फसल की कटाई - बुवाई समय से एक - डेढ़ महीने पहले करने लगे हैं क्यूंकि उन्हें कभी समय से पहले बारिश मिल जाती तो कभी समय के बाद इसलिए किसान यदि समय से पहले कृषि न करे तो फसल उगाना बड़ी मुश्किल हो जाती है अब धान की ही फसल को देख लो किसान ने जब फसल तैयार कर ली तब बारिश हो गयी और काफी धान का फसल नुकसान हो गया कितनी मेहनत कितनी लागत से फसल तैयार करते और जब वह बर्बाद हो जाता है तब उसकी परिकल्पना एक किसान ही लगा सकता है। 

मानव दिनचर्या को किस प्रकार प्रभावित कर रहा है

मनुष्य प्रत्येक दिन अपने जीवन यापन के लिए अपने घर से बाहर जाता है तो कभी ऐसा होता है। की बहुत ज्यादा ठण्ड या गर्मी की वजह से उसकी कार्यशक्ति में कमी आ जाती है जिसका असर उसके कार्यक्षमता और आय पर पड़ता है।  कई बार ऐसा होता है कि काम करते वक़्त ही बीमार पड़ जाना, मौसम बदलने से भी बीमारी का खतरा बढ़ जाती है कभी - कभी घर से बाहर किसी जरुरी काम से निकले पता चला बारिश आ गयी और रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। 

सारांश 

हमें आज जलवायु परिवर्तन को लेकर संवेदनशील होने की ज़रूरत है जिससे हम दूसरो को जागरूक कर सके सबसे बड़ी बात यदि विश्व के बड़े बड़े उद्योगपति इस पर संवेदनशीलता दिखाये तो दूसरे भी उनसे प्रेरित होकर जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता दिखाएंगे जो हमारे भविष्य के लिए वरदान सिद्ध होगा जलवायु परिवर्तन को बचाने के लिए हमें कम से कम प्राकृतिक और भूमि का शोषण करना होगा जो शायद असंभव है क्योंकि प्रत्येक की आवस्यकताएँ बढ़ रही जो जिस चीज का सेवन कर चुका उसके लिए छोड़ना आसान है पर जो उस सुख का भोग नहीं किया है उसके लिए वह किसी अमृत से काम नही है। इसलिए जलवायु परिवर्तन अभी और विकत रूप लेगी।

धन्यवाद कृपा लाइक कमेंट और शेयर करे। 


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

UP Agriculture

Electricity right of consumers rules :Rising of energy demand

Mental disability is more danger than physical disability