सोशल मीडिया का प्रभाव
समय के साथ कुछ न कुछ धीरे - धीरे बदलता रहता है। जो हमारे बस में नहीं है दुनिया इतनी विशाल है की चाहकर भी हम इसे नियंत्रित नहीं कर सकते, और हर एक दिमाग को नियंत्रित करना किसी न किसी तरह से हमारे लिए चुनौती है। उसी दिमाग से तकनीक का जन्म हुआ, और उसी तकनीक ने मोबाइल फ़ोन को जन्म दिया। आज लगभग हर परिवार में मोबाइल फ़ोन है, और कुछ बुजुर्ग सदस्यों को छोड़कर, परिवार के प्रत्येक सदस्य को इसे चलाना आता है।
आजकल हर कोई समाचार, फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब , और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर रहा है। चुकी हर किसी की सोचने समझने की छमता अलग अलग होती है, इसलिए वे अपनी रुचियों के अनुसार चीजों को देखते और उनका अनुसरण करते है। जिससे अलग- अलग राय और समझ विकसित होते है जिसके अनुसार वे अपने जीवन को एक नयी प्रारूप की तरफ ले जाते यदि हम आज के युवा की बात करे तो उन्हें अपने बुजुर्गो से जीवन के व्यावहारिक अनुभव के अलावा कुछ भी सीखने की जरुरत नहीं पड़ती क्योंकि प्रौद्योगिकी इतनी विराट स्वरुप ले चुकी है कि उन्हें सभी जानकारिया सीधे प्रौद्योगिकी पर ही उपलब्ध हो जाती हैं।
दिल्ली बेंगलुरु जैसे बड़े शहरो में प्रौद्योगिकी के व्यापक प्रसार को देखकर मैंने ज़मीनी स्तर पर इसके प्रभाव का अध्ययन करने का निर्णय लिया। मैंने उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों की यात्रा की और पाया की यहाँ भी लोग सोशल मीडिया पर घंटो बिताते हैं। एंड्राइड फ़ोन न चला पाने के कारण बुजुर्ग लोगो की संख्या काम थी, फिर भी वे सोशल मीडिया से दूर नहीं थे वे या तो अपने परिवार के फ़ोन पर या अपने पड़ोसी के फ़ोन से सोशल मीडिया से जुड़े हुए मिले।
मैंने अनगिनत लोगो से मिला और बात की जानकारिया इकठ्ठा की. मुझे कई ऐसे लोग मिले जिन्होंने इंस्टाग्राम के जरिए लड़कियों से संपर्क किया और आखिरकार शादी कर ली, और आज उनके बच्चे भी हैं। वही दूसरी तरफ कई ऐसे लोग मिले जो मोबाइल की वजह से अपनी जान गवाई क्योंकि शादी के बाद भी दूसरे महिला या पुरुष के साथ बात करते मिले और कुछ अन्य कारण भी थे।
लोग सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली जीवनशैली को अपना रहे हैं, जो चिंता का एक प्रमुख विषय बना हुआ है। लोगो के दृष्टिकोण को समझने के लिए मैंने वही एक ही वीडियो को ३० अलग - अलग व्यक्तियों को दिखाया और उनसे उनकी राय पूछी की इस वीडियो का सारांश क्या है आप जानकार आश्चर्य होंगे २१ व्यक्तियों का अलग - अलग जवाब था उनमें से अधिकांश लोग उस वीडियो से नकारात्मक चीजे ग्रहण की और उस वीडियो के माध्यम एक अलग राय तैयार की। इस उदाहरण के माध्यम से मैं ये बताना चाहता हूँ कि कैसे लोग किसी एक वीडियो या समाचार के आधार पर अलग - अलग धारणाएँ और राय बना लेते हैं।
ऐसा नहीं हैं कि सोशल मीडिया के केवल नकारात्मक प्रभाव ही हैं बल्कि मैं यह दिखने की कोशिश कर रहा हूँ कि लोग सोशल मीडिया पर जो देखते हैं , उसके आधार पर कैसे आकृति प्रदान कर रहे हैं मैं कोई विवादित लेख नहीं लिखना चाहता जिससे कि लोग अपना एक तर्क और विचार तैयार करे सोशल मीडिया के बारे में बल्कि मैं चाहता हूँ कि लोग सोशल अच्छी चीजे सीखे और आगे बढे। जैसे की हम सबने देखा कि अभिजीत दीपके ने अमेरिका से ही कॉकरोच जनता पार्टी बनायीं और कुछ ही घंटो में करोड़ो युवावों को इससे जोड़ दिया, यहाँ तक की एजुकेशन मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधानजी को इस्तीफ़ा देना पड़ा अपने पद से और अब यही प्रोसेस हमारे चीफ इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया ज्ञानेश कुमार जी के रहा है। जबकि वास्तविक रूप से हमें पता नहीं आखिरकार चल क्या रहा हैं तरह- तरह की अफवाहे फैली हुयी हैं और हमें ज़मीनी हकीकत का पता नहीं जब कोई मीडिया पर किसी के विरुद्ध बोलता हैं तो ज्यादातर लोग नकारात्मक सोच विकसित कर लेते हैं।
इससे मुझे एक नैतिक परिदृश्य याद आता हैं। मान लीजिए तीन लोग हैं a , b और c और एक चौथा व्यक्ति d है। a और c लगातार b के मन में d के बारे में नकारात्मक और कमिया डालते रहते हैं। जीसे की b के मन में एक निगे टिब तर्क और राय तैयार हो जाता है परिणाम स्वरुप जब भी b - d को देखता हैं तो वह अपना चेहरा फेर लेता है क्योंकि a और c ने d के प्रति विषाक्ति जो भर दी थी इसलिए वह d को बुरा व्यक्ति समझता है लेकिन एक दिन a ने सोचा चलो d से बात करते है जब a - d से बात की तब उसे अहसास हुआ की d वास्तव में बहुत अच्छा इंसान हैं , जिसके विचार बहुत नेक है बल्कि a और c में ही कमिया थी ठीक इसी प्रकार मैक्सिमम सोशल मीडिया के लोग अपना व्यू , लाइक्स बढ़ाने के लिए यही कर रहे है और हम कही न कही उनके खेल का हिस्सा बने हुए हैं।
तकनीकि अपने आप में हमें एक वरदान स्वरुप में मिला हैं यदि हम इसका सही इस्तेमाल करेंगे तो ये हमें उच्चतम बना देगा लेकिन दुरूपयोग करेंगे तो न्यूनतम की तरफ ले जायेगा जो हमारे विकास के लिए घातक सिद्ध होगा। मैं यह नहीं कह रहा की सभी प्रयोगकर्ता इसका दुरूपयोग कर रहे लेकिन कही न कही अपवाद तो बना हुआ है मैं ऐसे बहुत पढ़े लिखे लोगो से मिला जो सोशल मीडिया का रील्स देख कर भ्रमित हो जाते है तो इसका प्रभाव आम नागरिको पर कही न कही ज्यादा पड़ता हैं.ग्रामीण इलाको में मैं लोगो से बात करके और उनकी बात सुनकर ऐसा लगता है कि वे सोशल मीडिया पर कही गयी बातो को आँख बंद करके भरोसा कर लेते हैं प्रत्येक दिन चाय और समोसे के दुकान पर लोगो को लड़ते पाया प्रत्येक व्यक्ति अपनी बाते सही साबित करने पर लगा हैं वही अगर कोई शिक्षित व्यक्ति पहुंच जाए तो उसकी बेज्जती बढ़िया से कर देते उनके बीच वह मूर्ख बन जाता हैं।
हमें समझना होगा कि समाज में एक सम्मानित छवि बनाने के लिए किसी को उसकी अपनी पूरी ज़िन्दगी का त्याग और बलिदान छिपा होता हैं और हम सोशल मीडिया के दो और पांच मिनट के वीडियो से उसके जीवन का एक दर्पण तैयार कर लेते है और उस व्यक्ति के मान सम्मान प्रतिष्ठा को मिटटी में मिला देते हैं। परिणाम स्वरुप वह व्यक्ति समाज के हितकारी कल्याणकारी कार्य के बारे में सोचने से भी घबराता है हमारे समाज में ऐसे कई अनकही कहानिया दफन हैं।
क्या आपने कभी सोचा हैं ? प्रत्येक साल नए सिविल सर्विस परीक्षा उत्तीर्ण करके आईएएस अधिकारी बनते हैं। उनमें से कई वास्तविक बदलाव लाना चाहते हैं लेकिन सिस्टम का हिस्सा बनते ही वे सब कुछ भूल जाते है इसके पीछे वरिष्ठो , राजनेताओ और प्रभावशाली व्यक्तियों और सोशल मीडिया का दर छिपा हुआ होता हैं।
बुद्धा ने कहा था जब आँखे खुली तभी सबेरा हो जाता है हालाँकि यह बात यहाँ पूरी तरह लागू नहीं होती। कई आईएएस और आईपीएस अधिकारी और सम्मानित पदों पर आसीन लोगो का अतीत होता हैं। जीवन में आगे चलकर जब उनकी आँखे खुलती है और वे कुछ अच्छा करना चाहते हैं तो उन्हें अपनी अतीत का दर सताता हैं उन्हें सोशल मीडिया पर उनके अतीत को वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल किया जाता है। उनको भी इस वायरल वीडियो का डर होता है अपने मान सम्मान प्रतिष्ठा की जिससे वे अच्छे काम करने का विचार मन से निकाल देते हैं काफी जगह काम निकलवाने में तकनीकी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है मैं ये नहीं कह रहा सबके साथ ऐसा होता पर काफी लोगो के साथ ऐसा होता हैं।
मेरा सवाल सिर्फ इतना है हम किसी के वास्तविक पृस्ठभूमि को जाने बिना सोशल मीडिया के माध्यम से उसके जीवन के बारे में क्यों गलत राय बनाते हैं बिना सही गलत जाने निर्दय तक पहुंच जाते है। मैंने देखा है की सम्मानित और प्रभावशाली लोग घूमने फिरने यहाँ तक खुलके हॅसने के लिए एकांत ढूढ़ते कही सोशल मीडिया पर दिख न जाए या ऑस्ट्रेलिया ,कनाडा या अन्य देशो में चले जाते हैं जहा उन्हें गोपनीयता मिल सके। अंततः उनके जाने से हमारा ही नुकसान है ये लोग अगर यहाँ रहते तो हमारे लोगो को रोजगार के अवसर पैदा करते और हमारे देश के विकास में हमारा साथ देते।

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