Officers on Duty : पुलिस प्रशासन की जनहित कल्याण की भावना
पुलिस अधिकारी जो ड्यूटी पर या अपने निजी जीवन में निष्ठावान रहकर अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का न्यायपूर्वक निर्वहन करते हैं। जिससे हम और हमारा समाज एक सुव्यवस्थित और संतुलित जीवन बिता सके। पुलिस अपने कर्मठ निष्ठा से जनता की सुरक्षा प्रदान करता हैं। और उसके समस्या के निवारण के लिए उसके घर जाकर पूरी बात की जानकारी लेते है। और पक्ष - विपक्ष को ऑफिस पर बुलाकर दोनों का बयान लेते है और बयान लेने के बाद पक्ष - विपक्ष के बयानों को अधिकारी भली - भाति समझकर उसका निवारण करते हैं।
पुलिस प्रशासन की अग्निशमन में भागीदारी
जब पुलिस - अधिकारियों के साथ अग्निशमन करने के लिए क्षेत्र में पहुंचते है तो सर्वप्रथम अधिकारी यह पता लगाते है कि आस - पास पानी की सुविधा कहा है फिर वही पर अग्निशमन वाहन खड़ा करके और उसमें पाइप लगाकर अग्नि बुझाने का कार्य करते हैं। आग बुझने के बाद अधिकारी उस घटना स्थल पर जाकर नियमानुसार जांच करके प्रार्थी के नुकसान का यथाविधि कार्यवाही करके पीड़ित को मुआबजा दिलाने का कार्य करती है।
चुनाव प्रक्रिया में पुलिस प्रशासन की भागीदारी
चुनाव के लिए पुलिस प्रशासन एक महीने पहले से सभी पुलिस प्रशासनिक कर्मियों को इकठ्ठा करके प्रशिक्षण के लिए तैयार किया जाता है। और यह दिशानिर्देश दिया जाता है कि एक दिन पहले पोलिंग बूथ पर पहुंचकर वहा की कार्यविधि को सभाले और चुनाव के दिन व्यवस्थित और संतुलित तरीके से पोलिंग बूथ पर वोट डलाने का कार्य पूर्ण कराये। हम विचार कर सकते है कि यदि पुलिस प्रशासन अपना कार्य इतनी सत्यनिष्ठा से न करे तो समाज को व्यवस्थित करना कितना असहज हो सकता हैं। आप विचार कर सकते है कि जिन क्षेत्रो में पुलिस प्रशासन की कार्यविधि अच्छी नहीं है वहा अराजकता भी काफी है।
भारत में FIR दर्ज करने की विधि :
भारत में कोई भी व्यक्ति मारपीट, धमकी, चोरी, या अन्य संज्ञेय अपराध के मामले में सम्बंधित पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करा सकते है। यदि शिकायत से संज्ञेय अपराध का पता चलता है तो कानून के अनुसार FIR दर्ज की जाती हैं। कुछ मामलो में कानून के तहत जांच होती हैं गैर संज्ञेय अपराध के मामले में पुलिस मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना जांच नहीं कर सकती। शिकायतकर्ता को FIR को कॉपी निःशुल्क दी जाती हैं। FIR से आरोप साबित नहीं होता है। फिर के 24 घंटे या 72 घंटे में गिरफ़्तारी होती हैं.फिर 24 घंटे के अंदर अपराधी को मजिस्ट्रेट के यहाँ पेश करना होता हैं। फिर पुलिस रिमांड और जमानत की सुनवाई के बाद प्रशासन निर्दय लेती है की अपराधी के विरुद्ध क्या करना हैं।
पुलिस चार्जशीट कितने दिन में दाखिल करती है ?
चार्जशीट वह पुलिस रिपोर्ट है जिसमें जांच के बाद पुलिस बताती है क्या व्यक्ति के प्रति क्या सबूत मिले हैं फिर पुलिस रिपोर्ट के साथ अभियोजन के लिए सम्बंधित दस्तावेज न्यायालय में भेजे जाते है। फिर न्यायालय पुलिस रिपोर्ट पर विचार- विमर्श करती हैं। फिर अपराधी को वारंट जारी होता है। जिससे अपराधी को दस्तावेजों की प्रतिया मिलती है। और आरोप सिद्ध होने पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होती हैं। हालाँकि आरोपी हर बार अपने बचाव में कुछ गवाह या साबुत पेश कर सकता जिसका सही सिद्ध होने पर आरोपी रिहा हो सकता हैं। फिर अंतिम बहस और फैसला होता है। एक महत्वपूर्ण बात पुलिस की FIR और CHARGESHEET के आधार आगे की कार्यवाही आधारित होती हैं। इसलिए हमारे जीवन पुलिस की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती हैं।
दहेज़ के मामले में क़ानूनी प्रक्रिया
दहेज़ प्रथा के मामलो में दहेज़ माँगना,पति या ससुराल वालो द्वारा उत्पीड़न करना भी एक संज्ञेय अपराध है। जिस पर हमारी पुलिस प्रशासन लड़की के पक्ष में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हमारी पुलिस प्रशासन सम्पूर्ण प्रयास करती हैं कि समाज में सबको समान अधिकार मिले फिर वो चाहे लड़की हो या लड़का। किसी को ये अधिकार नहीं बनता की वो किसी का शोषण केवल इस आधार पर करे की उसे दहेज़ नहीं मिला और लड़की को प्रताड़ित किया जाय। हालाँकि आज भी भारत के लिए दहेज़ प्रथा एक बड़ी समस्या बनी हुयी जिसे हमारा समाज इन कुरीतियों को दूर नहीं कर पा रही है।
जनता की सुरक्षा
पुलिस चोरी,मारपीट और अन्य क्राइम को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है चाहे वह महिलाओं की सुरक्षा की बात हो यातायात व्यवस्था को संतुलित रखने का कार्य हो। आपदा के समय राहत पहुंचने कार्य हमारी पुलिस प्रशासन ही करती है। जनता और पुलिस के बीच का विश्वास इतना सुदृढ़ है की लोग अपनी समस्या के निवारण हेतु सबसे पहले पुलिस प्रशासन के पास ही लोग जाते हैं। और पुलिस अपराध की निष्पक्ष जांच करके शांति और कानून व्यवस्था को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पुलिस के प्रति लोगो का विश्वास ही सामाजिक सुरक्षा का मूल ढांचा बना हुआ है। जिससे हम और आप एक शांतिपूर्ण जीवन का निर्वहन कर पा रहे हैं।
सारांश
हमारे बीच पुलिस प्रशासन के बीच बहुत सारे मतभेद होते है की क्या पुलिस प्रशासन वास्तव में सामाजिक सुरक्षा का मूल ढांचा है तो उत्तर है हां। हम केवल एक ही राय रखते है यदि हम पुलिस प्रशासन के विभिन्न हित कार्यों और समाज में फैले कुरूतियों के बारे में जाचेंगे, और उन्हें ठीक-ठीक समझने का प्रयास करेंगे तो हम उनकी त्याग और उपयोगिता को भली - भाति समझ सकेंगे। की उनका होना हमारे समाज के लिए कितना महत्वपूर्ण है। जो 24 घंटे हमारी सेवा में उपलध रहकर अपनी त्याग और आदर्श का परचम लहराते है। मैं दिल से उनके त्याग और बलिदान को प्रणाम करता हूँ और विश्वास करता हूँ की वे इसी प्रकार जान कल्याण की भावना रखते हुए आगे भी अपना कार्य करते रहेंगे।

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