Study Motivation Hindi
हम सभी के दिमाग में एक सवाल जो हर दिन आता है की कैसे कुछ लोग लगातार अध्ययन करते रहते हैं और एक दिन वे सफल हो जाते है और हम यही काम नहीं कर पाते है तो चलो आज हम इसी विषय को समझने का प्रयास करते है मैं भी विद्यार्थी था तब ये सवाल मेरे भी मन में आते थे की किस प्रकार मैं अपने समय को बेकार के कामो में नष्ट कर देता था फिर पश्चाताप करता था कि मेरा आज का दिन बेकार चला गया आज मैं यदि अध्ययन किया होता तो कितनी सारी चीजे पढ़ा होता पर मैंने अपना समय बेकार के कामो में नष्ट कर दिया। फिर मुझे एहसास हुआ की मेरे माता पिता कितनी संघर्षो से मुझे पढ़ा रहे हैं अपना सुख त्यागकर मेरे खुशियों का दीप जला रहे है।
और मैं अपना दिन बेकार के कामो में नष्ट कर रहा फिर मैं अपने माता पिता के संघर्षो का अपना जूनून बनाया और पढाई शुरू की पहले - पहले किताबो में मन नहीं लगता था फिर मैंने एक लक्ष्य बनाया की मुझे ये टॉपिक आज ख़त्म करना हैं मुझे किसी से तुलना नहीं करनी हैं की वह कितने घण्टे पढ़ रहा हैं मुझे सिर्फ स्वयं पर फोकस करना है की मैं खुद को कितना समय दे रहा हूँ पढाई में पहले कुछ महीने समस्याएं आयी पर धीरे - धीरे मैं बेहतर करता चला गया और एक दिन ऐसा आया जब मैं अपने क्लास का टॉपर बना तब मुझे खुद पर गर्व महसूस हुआ और यही गर्व मेरा जूनून बना हमें समझना चाहिए कि यदि हमारी निरंतरता और अनुशासन हमारी अध्ययन में आ जाएगी तो हम हर वो उपलब्धि प्राप्त कर सकते है जो हम चाहेंगे।
इसलिए हमें दूसरो पर ध्यान न देकर खुद की मेहनत पर ध्यान देना चाहिए यही हमें सफल बना सकती हैं मुझे एक कविता याद आती है चार लाइन की।
वो लक्ष्य ही क्या जो तुम्हे डगमगा दे, लगा दो अपनी सारी ऊर्जा, शायद यही तेरी किस्मत बना दे।
हमें सबसे पहले अपना लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए फिर उस तक पहुंचने के लिए सही पृष्ठभूमि तैयार करनी चाहिए फिर उसके लिए निरन्तर प्रयत्न करना चाहिए क्यूंकि हमारा लक्ष्य ही हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। हमें अनुशासित करती हैं जिस प्रकार शीलों का आचरण करने से ध्यान साधना में वृद्धि होती हैं और ध्यान साधना से ज्ञान का उदय होता हैं जिससे शीलो का आचरण करना संभव हो पाता हैं जिससे काम, क्रोध, तृष्णा से दूर हो अपने अंदर ज्ञान का दीप जलाकर अपने शिक्षा के मार्ग में आगे बढ़ सकते हैं।
आज के समय में विद्यार्थी जीवन के विचलित होने के बहुत से कारण हो सकते हैं जैसे मोबाइल का हर समय पास होना, संसाधनों प्रचुरता और लम्बे समय तक पढाई करने के बावजूद सफल न होना पर इसका तात्पर्य ये तो नहीं की हम इन संसाधनों के बीच रहते हुए खुद को भूल जाए माता - पिता के संघर्षो को भूल जाए क्या हम नहीं चाहते की हमारे नाम से हमारे माता पिता का नाम सम्बोधित हो हमारी अनुशासन की चर्चाये राष्ट्रहित में हो। हम सब चाहते हैं फिर हम अपने कर्तव्यों से क्यों भाग रहे हमें अपने कर्तव्यों की सुदृढ़ देखभाल करना चाहिए जब की हमारा कर्त्तव्य हमारी इक इच्छा न बन जाए।
गीता में भगवान् श्री कृष्ण जी कहते हैं की हे अर्जुन जब हम एक उपद्रवी घोड़े को अपने वश में कर लेते है तो वह घोडा उसी तरफ जाता हैं जिस तरफ हम चाबुक घुमा कर उसको ले जाना चाहते है ठीक उसी प्रकार हमारा मन होता हैं जो बार - बार अपने मार्ग से भटकता रहता हैं लेकिन हमें बार - बार उसे सही मार्ग पर लाना होता है जब वह स्थिर हो जाता है तो उसे हम घोड़े की भाति जिधर ले जाना चाहेंगे उधर वह जायेगा इसलिए हमें अध्ययन के दौरान जितनी भी विषाक्ति अपनी तरफ खींचती हैं उससे भूलकर अपने मन को केंद्रित करके अध्ययन की तरफ ले जाना चाहिए। मैं एक कविता के माध्यम से समझाना चाहूँगा -
अपनी दुनिया सबसे प्यारी चार दीवारों वाली, जिन शीटों पर बैठ दिन रात कब हो जाती। भीड़ से भरी इस दुनिया से बेफिक्र हो किताबो की दुनिया में सिमट कर रह जाती। लगता जैसे चंचल मन का ठहराव हो गया हो, खुद को इन्ही के अंदर विसर्जित कर दुनिया से अलगाव हो गया हो , पर बूँद - बूँद कर बरसने वाली किताबो के ज्ञान की वर्षा, आँखों से होकर आत्मा को जागृत करने वाली, इसलिए अपनी दुनिया सबसे प्यारी चार दीवारों वाली।
ये कविता मैं तब लिखा था जब दिल्ली में IIT के विद्यार्थियों के साथ पढ़ रहा था हम लोग सालों -सालों ऐसे ही मेहनत किया करते थे अपनी लक्ष्य के लिए, जब कभी मन नहीं लगता पढ़ने में तो घूमने निकल जाते थे फिर खुद को स्थिर करके मेहनत करना प्रारम्भ कर देते थे हमारी निरंतरता ही हमें यहाँ तक पहुचायी हम विषय को लेकर छोटे छोटे लक्ष्य निर्धारित करते थे और उसको जब तक समाप्त नहीं कर देते तब तक कुर्सी छोड़ते नहीं थे।
अध्ययन करने में तब तक मज़ा नहीं आता जब तक की हमें अध्ययन में मजा न आने लगे जब हमें अध्ययन में मजा आना प्रारम्भ हो जाता हैं फिर हमें किसी प्रेरणा की ज़रूरत नहीं पड़ती तब हम खुद दूसरो के लिए प्रेरणा बनने लगते हैं इसलिए यदि अभी हमारे मार्ग में कोई भी त्रुटि आ रही हैं अध्ययन के रूकावट में तो उस रुकावट को दूर करे और अपने मार्ग में आगे बढे और ये हम खुद कर सकते हैं कोई दूसरा हमारे मार्ग की त्रुटियों को नहीं दूर नहीं कर सकता वह केवल मार्ग बता सकता हैं चलना हमें ही पड़ेगा।
धन्यवाद कृपा लाइक कमेंट करें।

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