संदेश

Study Motivation Hindi

चित्र
 हम सभी के दिमाग में एक सवाल जो हर दिन आता है की कैसे कुछ लोग लगातार अध्ययन करते रहते हैं और एक दिन वे सफल हो जाते है और हम यही काम नहीं कर पाते है तो चलो आज हम इसी विषय को समझने का प्रयास करते है मैं भी विद्यार्थी था तब ये सवाल मेरे भी मन में आते थे की किस प्रकार मैं अपने समय को बेकार के कामो में नष्ट कर देता था फिर पश्चाताप करता था कि मेरा आज का दिन बेकार चला गया आज मैं यदि अध्ययन किया होता तो कितनी सारी चीजे पढ़ा होता पर मैंने अपना समय बेकार के कामो में नष्ट कर दिया। फिर मुझे एहसास हुआ की मेरे माता पिता कितनी संघर्षो से मुझे पढ़ा रहे हैं अपना सुख त्यागकर मेरे खुशियों का दीप जला रहे है।  और मैं अपना दिन बेकार के कामो में नष्ट कर रहा फिर मैं अपने माता पिता के संघर्षो का अपना जूनून बनाया और पढाई शुरू की पहले - पहले किताबो में मन नहीं लगता था फिर मैंने एक लक्ष्य बनाया की मुझे ये टॉपिक आज ख़त्म करना हैं मुझे किसी से तुलना नहीं करनी हैं की वह कितने घण्टे पढ़ रहा हैं मुझे सिर्फ स्वयं पर फोकस करना है की मैं खुद को कितना समय दे रहा हूँ पढाई में पहले कुछ महीने समस्याएं आयी पर धीरे - धीरे...

गाँव

चित्र
मेरा जन्म एक छोटे से गाँव में हुआ वहा की खूबसूरती में मेरा बचपन बीता था हालाँकि वहा खेलने के लिए हमारे पास संसाधन कम होते थे लेकिन हमारे पास अवसर कम नहीं होते थे हम खेलने के लिए अलग -अलग संसाधन ढूढ ही लेते थे कही हम लोग समूह बनाकर लुका छिपी खेलते तो कही ज़मीन पर लकीरे खींच कर एक दूसरे की लकीरे ढूढते और जो ज्यादा लकीरे खोजकर मिटाने में सफल होता था वही विजयी होता था यदि सामान्य रूप से कहा जाय तो हम शहर से ज्यादा आनन्द लेते थे गाँव में पर समय के अनुसार तकनीक आया और सब कुछ खुद में समेट लिया अब जब मैं गांव जाता तो देखता हूँ जहा हम पहले खेला करते थे वहा घर बन गए।  जिन जंगलो में हम भैंस गाय चराने जाया करते थे वह जंगल कट गए और वहा फसल उगने लगे जिन तालाबो में हम मछली पकड़ते थे और पौनार, भसीड़ निकाल कर खाया करते थे अब वे तालाब पोखरे मछली पालन करने वालो का कब्ज़ा हो गया।  यदि स्पष्ट रूप से कहा जाय तो गाँव  में बहुत कुछ बदल गया अब लोग गाँव  में कम रहना पसंद करते क्यूंकि ज्यादातर उनका जीवन शहर के उन गलियों में सिमट कर रह जाती हैं जहा उनको रोजगार मिला, कुछ लोगो को अच्छी जीवन मिली उससे...

जुकाम कैसे ठीक करें।

चित्र
देशी नुस्खे कितने कारगर सिद्ध होते हैं हमारे लिए ये हम तब समझे  जब मैं बीमार पड़ा और ठीक होने का नाम ही नहीं ले रहा था फिर गाँव  गया और वह की देशी नुस्खे मेरे लिए कारगर सिद्ध हुयी और मैं बिलकुल ठीक हो गया इसलिए अब जब मुझे दिल्ली में जुकाम बुखार होती तो मैं गाँव चला जाता और वह मेरी माँ देशी काढ़ा पिलाती और साथ में पपीता की पत्ती सुबह के समय पीस कर देती साथ में एक गिलास बकरी की दूध के साथ पीना होता था और मैं दो - तीन दिन में बिलकुल ठीक हो जाता था इससे मुझे केवल आराम ही नहीं मिलता था बल्कि मुझे अन्दर से ताक़त भी मिलती थी पर ध्यान रहे की पपीता की पत्ती का थोड़ा सा पार्ट पीस कर पीना होता है यदि इसकी मात्रा ज्यादा हो गयी तो हमें लूज मोशन हो जाती है और बकरी का दूध हमारे लिए फायदेमंद हैं ही।  चलो जानने का प्रयास करते हैं की मेरी माँ क्या - क्या करती हैं जब मुझे जुकाम बुखार और खासी आती है सबसे पहले अलाव जला कर थोड़ा सा कड़वा तेल पैर के तलो में लगाकर सेकना होता है जिससे सिर और शरीर का तनाव कम हो जाता है ऐसा सुबह शाम दो - तीन दिन करने से बिल्कुल ठीक हो जाते हैं साथ में काढ़ा बनाती मिट्टी क...

जल जीवन मिशन

चित्र
जल जीवन मिशन की स्थापना हमारे प्रधान मंत्री जी द्वारा 15 अगस्त 2019  में गयी थी जिसका उद्देश्य था की शहर से लेकर ग्रामीण तक लोगो को पाइप द्वारा सप्लाई नल कनेक्शन मिले 2024 तक।  लेकिन अभी तक इसमें हमारी सरकार 100 % सफल नहीं हुआ  हैं लेकिन इस पर कार्य जोर सोर के साथ ग्रामीण इलाको में चल रही हैं।  मैंने रीसर्च में कई ग्रामीण इलाको में पाया की वहा  नल कनेक्शन सप्लाई का पानी आ रहा हैं लेकिन आज भी ग्रामीण के लोगो से एक सवाल हमेशा सुनने को मिलता  हैं कि क्या जिस प्रकार से सरकार लाइट की बिल या अन्य सुविधा के लिए हमें सरकार को बिल देने होते उसी प्रकार की सेवा ये भी तो नहीं हो जाएँगी।  मैंने  जब पाइप लगाने वाले व्यक्तियों से बात की तो पता चला काफी लोग इतना डरे हुए हैं कि ग्रामीण क्षेत्र में वे अपने घर के सामने अभी तक पाइप नहीं लगवाए लड़ाई करने को तैयार हो जाते उनका सवाल ये भी हैं की क्या हमें सरकार स्वच्छ जल  सप्लाई करेगी  या नहीं तब तो हमारे घर का नल बंद करा दिया जायेगा शहर की तरह और इसका भी बिल लेगी सरकार हमसे एक कारण ये भी है कि सरकार अभी तक क्य...

सोशल मीडिया का प्रभाव

चित्र
समय के साथ कुछ  न कुछ  धीरे - धीरे बदलता  रहता है।  जो हमारे बस में नहीं है  दुनिया इतनी विशाल है की चाहकर भी हम  इसे नियंत्रित नहीं कर सकते, और हर एक दिमाग को नियंत्रित करना किसी न किसी तरह से हमारे लिए चुनौती है। उसी दिमाग से तकनीक का जन्म हुआ, और उसी तकनीक ने मोबाइल  फ़ोन  को जन्म दिया। आज लगभग हर परिवार में मोबाइल फ़ोन है, और कुछ बुजुर्ग सदस्यों को छोड़कर, परिवार के  प्रत्येक सदस्य को इसे चलाना आता है।  आजकल हर कोई समाचार, फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब , और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर रहा है।  चुकी हर किसी की सोचने  समझने की छमता अलग अलग होती है,  इसलिए वे अपनी रुचियों के अनुसार चीजों को देखते और उनका अनुसरण करते है।  जिससे अलग- अलग राय और समझ विकसित होते है  जिसके अनुसार वे अपने जीवन को एक नयी प्रारूप की तरफ ले जाते यदि हम आज के युवा की बात करे  तो उन्हें अपने बुजुर्गो से जीवन के व्यावहारिक अनुभव के अलावा कुछ भी सीखने की जरुरत नहीं पड़ती क्योंकि प्रौद्योगिकी इतनी विराट ...

The impact of social media

चित्र
 With time, some things or other keep changing gradually. Which is beyond our jurisdiction. The world is so vast that even if we want to, we can not control it, and controlling every single mind is somehow a challenge for us. From that very mind, technology was born, and that same technology gave birth to the mobile phone. Today, almost every family has a mobile, and leaving aside a few elderly members, everyone in the family knows at least a little bit about how to operate it.  Everyone is gaining information through social media platforms like news, Facebook, Twitter, YouTube, and Instagram. Since everyone has a different capacity to think and understand, they follow things and watch content according to their own interests, there by shaping different opinions, and understandings, and decisions. If we talk about today's children, they do not need to learn anything from their elders except for practical experience, because technology has advanced so much that all facilities a...

DBT Agriculture

चित्र
 How pesticides are affecting our daily life is forcing us to deliberate upon this fact, and today we will try to understand this fact point by point. This topic will not only make us aware but will also force us to think deeply about the ecological imbalance caused by its harmful effects. So, let us try to understand it.  Thousands of years ago, when farmers first started practicing agriculture, they would put a massive amount of effort in to raising crops, only to have pests destroy them. because of this, farmers began spraying ash on their crops. As we gradually developed further, various methods were tried to eradicate these crop damaging pest completely, but none were successful. however, during the second world war , many chemical's discovered. When these were applied to crops, it successfully kept the pest away. Following this between 1950 and 1960, the research and development of these chemicals accelerated greatly. thanks to these achievements, we have successfully in...