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AI Flows : AI हमारे दैनिक जीवन को एक नयी आकृति प्रदान कर रहा है

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 किसी देश की तकनीकी वहा के रिसर्च पर निर्भर करती है और रिसर्च वह ताक़त है जो किसी समस्या का समाधान खोजने की मार्गदर्शक बनती हैं। हम सभी जानते है कि सभी देश Ai की दुनिया में आगे बढ़ने के लिए तेजी के साथ आगे आ रहे है। वे जानते हैं कि यदि हम Ai की दुनिया में पीछे रहे तो भविष्य में हमारा वज़ूद संकट में आ सकता है। यही देखते हुए हमारी सरकार हर साल लगभग 12000 करोड़ से ज्यादा तकनीकी प्रक्रिया में खर्च कर रही है।  वैज्ञानिक सोच AI के साथ  यही नही बल्कि प्राइवेट सेक्टर भी तकनीकी क्षेत्र को एक नयी दिशा प्रदान करने के लिए बराबर की भागीदारी दे रहा है। अब जब Ai इतनी तेजी के साथ अपनी भूमिका को एक नयी स्वरुप प्रदान कर रहा है। तो एक सवाल जो हम सभी के दिमाग में आता है कि Ai के इस दौर में वैज्ञानिक समझ कैसे विकसित होगा तो जवाब है की एक वैज्ञानिक केवल अपनी सफलताओं के लिए तालियाँ नहीं बजाता बल्कि छोटी छोटी असफलताओ से सीखकर अपनी समझ को विकसित करके एक नये भविष्य का निर्माण करता है। वह केवल समस्याओं का निवारण ही नहीं देता बल्कि सवाल करके अपनी वैज्ञानिक समझ को विकसित करता है।  Ai के इस दौर में ह...

Officers on Duty : पुलिस प्रशासन की जनहित कल्याण की भावना

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पुलिस अधिकारी जो ड्यूटी पर या अपने निजी जीवन में निष्ठावान रहकर अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का न्यायपूर्वक निर्वहन करते हैं। जिससे हम और हमारा समाज एक सुव्यवस्थित और संतुलित जीवन बिता सके। पुलिस अपने कर्मठ निष्ठा से जनता की सुरक्षा प्रदान करता हैं। और उसके समस्या के निवारण के लिए उसके घर जाकर पूरी बात की जानकारी लेते है। और पक्ष - विपक्ष को ऑफिस पर बुलाकर दोनों का बयान लेते है और बयान लेने के बाद पक्ष - विपक्ष के बयानों को अधिकारी भली - भाति समझकर उसका निवारण करते हैं।  पुलिस प्रशासन की अग्निशमन में भागीदारी   जब पुलिस - अधिकारियों के साथ अग्निशमन करने के लिए क्षेत्र में पहुंचते है तो सर्वप्रथम अधिकारी यह पता लगाते  है कि आस - पास पानी की सुविधा कहा है फिर वही पर अग्निशमन वाहन खड़ा करके और उसमें पाइप लगाकर अग्नि बुझाने का कार्य करते हैं। आग बुझने के बाद अधिकारी उस घटना स्थल पर जाकर नियमानुसार जांच करके प्रार्थी के नुकसान का यथाविधि कार्यवाही करके पीड़ित को मुआबजा दिलाने का कार्य करती है।  चुनाव प्रक्रिया में पुलिस प्रशासन की भागीदारी  चुनाव के लिए पुलिस प...

तराजू : कुछ तराजू को सही तरीके से बैलेंस करने में अधिकारी और न्यायलय को दुविधा क्यों होती है।

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 न्याय प्रणाली और दुविधा  यह विषय उन पाठकों को आकर्षित करेगा जो कानून , सामाजिक न्याय और निष्पक्षता में रूचि रखते है। आज मैं उन विषयों पर पर्दा उठाऊंगा जिन विषयों को लेकर हमारे समाज के प्रत्येक नागरिक के बीच यह दुविधा रहती है। कि क्या जब हम किसी विषय पर निष्पक्षता से न्याय की गुहार लगाते है प्रशासनिक पद्धति में , तो क्या हमें सही न्याय मिल पाती है। और इस दुविधा को लेकर हमारे अधिकारियों और न्यायलय के बीच क्या दुविधा रहती है।  मैंने सरकारी पद पर काम कर रहे अलग - अलग अधिकारियों से बात की चाहे वो पुलिस प्रशासन हो या फिर निम्नतम न्यायालय से लेकर उच्चतम न्यायालय के वकील हो। और मैं जानने का प्रयास किया की किस प्रकार ये पद्धति काम करती है। और किस प्रकार लोगो को न्याय मिलती है तो चलो जानने का प्रयास करते है।  लंबित मुकदमे  हम सभी जानते है कि सर्वोच्च अधिकारी यह सलाह देती है कि किस प्रकार सामाजिक पद्धति को चलाना हैं। और किस प्रकार लोगो को न्याय मिलना चाहिए। लेकिन यदि हम भारत जैसे देश के न्यायालय की बात करे तो लगभग 4.5 crore केस लंबित है निम्नतम न्यायालय में और लगभग 60000 ...

आज भी हम मौन है।

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यह कहानी हमारे ही समाज की है जहा की जनता आज भी मौन रहती हैं जब उनके ही आँखों के सामने उनका शोषण होता है। इस समस्या की जड़ तक मैं जाने का प्रयास किया तो पाया की जो चल रहा वो कोई आज की नयी बात नहीं है ये सालो से चली आ रही है मुझे दुख तब हुआ जब देखा की पढ़े लिखे लोग भी गलत चीजों पर आवाज नहीं उठाते जब तक की वह शोषण उनके परिवार से न होकर गुजरे।  मैं इस विषय पर लिखने के बारे में तब सोचा जब मै इन समस्याओं के बीच से गुजरा जब मैं गांव में एक साल बिताया।  तो पाया की हमारी सरकार गांव को विकसित करने के लिए और गांव के लोगो को मनरेगा या VB G RAM G के द्वारा रोजगार तो देती हैं पर लोगो को रोजगार मिलता ही नहीं उसके पीछे का कारण गांव के लोग ही है। तो चलो कुछ चीजों को जानने का प्रयास करते है।  आज भी हम मौन क्यों है  मैंने देखा की जब MGNREGA या VB G RAM G के अंतर्गत गांव में काम चलता है तो गांव के प्रधान चार आदमी करके VB G RAM G के अंतर्गत का काम 10 दिन में ही समाप्त करवा देते या फिर मशीन लगाकर काम करवा देते।  फिर महीनो तक गांव की महिलाओं का रोज सुबह फोटो खींचकर कर सरकारी डाटा पर अपल...

जलवायु परिवर्तन : यह हमारे जीवन और भविष्य को कैसे प्रभावित कर रहा है।

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 जलवायु परिवर्तन किस प्रकार हमारे जीवन को प्रभावित कर रही हैं इस विषय पर हम सभी को संवेदनशील होने की ज़रूरत हैं क्योंकि जब हम जलवायु परिवर्तन पर संवेदनशील होंगे तभी हम इसके प्रभाव के बारे में सही निर्णय निकाल पाएंगे की ये किस प्रकार हमारे दिनचर्या को प्रभावित कर रही है आज हम सभी समाचार पत्रों, टेलीविजन, सोशल मीडिया और अन्य संस्थाओ के माध्यम से ये जानने में समर्थ हैं। कि किस प्रकार जलवायु परिवर्तन हमारे दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है यही नहीं इसका हमारे भविष्य पर चलकर क्या खतरा पड़ेगा जिसकी हम आज कल्पना भी नहीं कर सकते है। एक सवाल जो हमारे दिमाग अक्सर आता हैं की आखिर जलवायु परिवर्तन हैं क्या और यह किस प्रकार हमारे जीवन को प्रभावित कर रहा है तो चलो जानने की कोशिश करते है।  जलवायु परिवर्तन हैं क्या  किसी स्थान पर लम्बे समय से चल रही प्राकृतिक गतिविधियो में अचानक वहा के ताप और मौसम में हुए परिवर्तन को ही जलवायु परिवर्तन कहते है वैसे तो जितनी सहजता से हमने इसकी व्याख्या की उतनी सहजता के साथ जलवायु परिवर्तन होता नहीं है इसके पीछे बहुत सी मानवीय और प्राकृतिक गतिविधियाँ होती है इसे...

Study Motivation Hindi

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 हम सभी के दिमाग में एक सवाल जो हर दिन आता है की कैसे कुछ लोग लगातार अध्ययन करते रहते हैं और एक दिन वे सफल हो जाते है और हम यही काम नहीं कर पाते है तो चलो आज हम इसी विषय को समझने का प्रयास करते है मैं भी विद्यार्थी था तब ये सवाल मेरे भी मन में आते थे की किस प्रकार मैं अपने समय को बेकार के कामो में नष्ट कर देता था फिर पश्चाताप करता था कि मेरा आज का दिन बेकार चला गया आज मैं यदि अध्ययन किया होता तो कितनी सारी चीजे पढ़ा होता पर मैंने अपना समय बेकार के कामो में नष्ट कर दिया। फिर मुझे एहसास हुआ की मेरे माता पिता कितनी संघर्षो से मुझे पढ़ा रहे हैं अपना सुख त्यागकर मेरे खुशियों का दीप जला रहे है।  और मैं अपना दिन बेकार के कामो में नष्ट कर रहा फिर मैं अपने माता पिता के संघर्षो का अपना जूनून बनाया और पढाई शुरू की पहले - पहले किताबो में मन नहीं लगता था फिर मैंने एक लक्ष्य बनाया की मुझे ये टॉपिक आज ख़त्म करना हैं मुझे किसी से तुलना नहीं करनी हैं की वह कितने घण्टे पढ़ रहा हैं मुझे सिर्फ स्वयं पर फोकस करना है की मैं खुद को कितना समय दे रहा हूँ पढाई में पहले कुछ महीने समस्याएं आयी पर धीरे - धीरे...

गाँव

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मेरा जन्म एक छोटे से गाँव में हुआ वहा की खूबसूरती में मेरा बचपन बीता था हालाँकि वहा खेलने के लिए हमारे पास संसाधन कम होते थे लेकिन हमारे पास अवसर कम नहीं होते थे हम खेलने के लिए अलग -अलग संसाधन ढूढ ही लेते थे कही हम लोग समूह बनाकर लुका छिपी खेलते तो कही ज़मीन पर लकीरे खींच कर एक दूसरे की लकीरे ढूढते और जो ज्यादा लकीरे खोजकर मिटाने में सफल होता था वही विजयी होता था यदि सामान्य रूप से कहा जाय तो हम शहर से ज्यादा आनन्द लेते थे गाँव में पर समय के अनुसार तकनीक आया और सब कुछ खुद में समेट लिया अब जब मैं गांव जाता तो देखता हूँ जहा हम पहले खेला करते थे वहा घर बन गए।  जिन जंगलो में हम भैंस गाय चराने जाया करते थे वह जंगल कट गए और वहा फसल उगने लगे जिन तालाबो में हम मछली पकड़ते थे और पौनार, भसीड़ निकाल कर खाया करते थे अब वे तालाब पोखरे मछली पालन करने वालो का कब्ज़ा हो गया।  यदि स्पष्ट रूप से कहा जाय तो गाँव  में बहुत कुछ बदल गया अब लोग गाँव  में कम रहना पसंद करते क्यूंकि ज्यादातर उनका जीवन शहर के उन गलियों में सिमट कर रह जाती हैं जहा उनको रोजगार मिला, कुछ लोगो को अच्छी जीवन मिली उससे...